Singapore Loan Default – 1.75 करोड़ का कर्ज बना 147 करोड़! ब्याज और पेनल्टी ने कैसे बिगाड़ दी सिंगापुर के शख्स की ज़िंदगी
Singapore Loan Default – 1.75 करोड़ का कर्ज बना 147 करोड़! ब्याज और पेनल्टी ने कैसे बिगाड़ दी सिंगापुर के शख्स की ज़िंदगी
Singapore Loan Default – कर्ज अगर सही शर्तों पर न लिया जाए, तो वह किसी भी इंसान की पूरी ज़िंदगी उलट-पलट कर सकता है। सिंगापुर से सामने आया एक मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां 1.75 करोड़ रुपये का लोन बढ़ते-बढ़ते 147 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस हैरान कर देने वाले मामले ने एक बार फिर हाई-इंटरेस्ट लोन और पेनल्टी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2010 में लिया था 1.75 करोड़ का लोन
The Straits Times की रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर के इस व्यक्ति ने साल 2010 में एक लाइसेंस प्राप्त मनीलेंडर से करीब 1.75 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
लोन की शर्तें बेहद सख्त थीं—
4% मासिक ब्याज
8% लेट पेमेंट इंटरेस्ट
हर महीने अलग से लेट पेमेंट प्रोसेसिंग फीस
शुरुआत में यह रकम संभालने लायक लग रही थी, लेकिन समय के साथ ब्याज और जुर्माने ने कर्ज को बेकाबू कर दिया।
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चार साल में ही दोगुना से ज्यादा हुआ कर्ज
सिर्फ चार साल के भीतर ही यह लोन 1.75 करोड़ से बढ़कर करीब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
इसके बाद ब्याज और पेनल्टी का चक्र चलता रहा और रकम हर साल तेजी से बढ़ती चली गई।
आखिरकार साल 2021 तक पहुंचते-पहुंचते यह बकाया रकम 147 करोड़ रुपये तक जा पहुंची, जिसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाए।
कर्ज चुकाने के लिए बेचना पड़ा 14 करोड़ का घर
कर्ज के दबाव में आकर व्यक्ति ने जुलाई 2016 में अपना 14 करोड़ रुपये का घर मनीलेंडिंग कंपनी के डायरेक्टर को बेच दिया।
हैरानी की बात यह है कि घर बेचने के बाद भी वह अपने परिवार के साथ उसी मकान में किराएदार बनकर रहने लगा।
इसके लिए उसे हर महीने करीब 5 से 6 लाख रुपये किराया देना पड़ता था।
यानी कर्ज खत्म होने के बजाय उसकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ती चली गईं।
किराया विवाद से मामला पहुंचा अदालत
बाद में किराया भुगतान को लेकर विवाद हुआ और व्यक्ति ने घर खाली करने से इनकार कर दिया।
मामला सिंगापुर हाई कोर्ट तक पहुंच गया, जहां जज Philip Jeyeratnam ने इस केस को बेहद गंभीर बताया।
जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि
“1.74 करोड़ रुपये का लोन ब्याज और फीस के कारण टेंस ऑफ मिलियंस तक पहुंच जाना बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक है।”
हाई कोर्ट ने दिया रिट्रायल का आदेश
उधारकर्ता का आरोप है कि पूरा समझौता केवल दिखावे के लिए था और इसमें
धोखाधड़ी
भ्रम
कानूनी कर्तव्यों के उल्लंघन
की संभावना हो सकती है।
इन्हीं आरोपों को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने मामले का रिट्रायल कराने का आदेश दिया है, ताकि यह साफ हो सके कि यह लेनदेन कहीं अवैध तरीके से तो नहीं किया गया।
यह मामला क्या सिखाता है?
यह केस एक कड़ी चेतावनी है कि
हाई-इंटरेस्ट लोन
मासिक कंपाउंडिंग
लेट पेमेंट पेनल्टी
कैसे किसी छोटे से कर्ज को भी आर्थिक तबाही में बदल सकते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. 1.75 करोड़ का लोन 147 करोड़ कैसे हो गया?
उच्च मासिक ब्याज, लेट फीस और लंबे समय तक भुगतान न होने के कारण।
Q2. इस लोन पर ब्याज दर कितनी थी?
4% प्रति माह ब्याज और 8% लेट पेमेंट ब्याज।
Q3. क्या यह मनीलेंडर लीगल था?
हां, वह लाइसेंस प्राप्त था, लेकिन शर्तें बेहद सख्त थीं।
Q4. क्या व्यक्ति ने घर बेचकर भी कर्ज खत्म नहीं किया?
नहीं, 14 करोड़ का घर बेचने के बाद भी कर्ज पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
Q5. व्यक्ति उसी घर में क्यों रहता रहा?
घर बेचने के बाद वह उसी मकान में किराए पर रहने लगा।
Q6. अदालत ने इस मामले में क्या कहा?
हाई कोर्ट ने राशि को ‘चौंकाने वाली’ बताया।
Q7. रिट्रायल का आदेश क्यों दिया गया?
संभावित धोखाधड़ी और कानूनी उल्लंघन की जांच के लिए।
Q8. क्या भारत में भी ऐसा हो सकता है?
अगर हाई-इंटरेस्ट और गैर-पारदर्शी लोन लिए जाएं, तो जोखिम रहता है।
Q9. ऐसे कर्ज से कैसे बचा जाए?
लोन की शर्तें पढ़ें, मासिक ब्याज से बचें और समय पर भुगतान करें।
Q10. इस केस से सबसे बड़ी सीख क्या है?
कर्ज लेते समय ब्याज और पेनल्टी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
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