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Employee Pension Scheme – EPS – Complete Guide in Hindi

Employee Pension Scheme – EPS – Complete Guide in Hindi

भारत में कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद की आर्थिक सुरक्षा के लिए Employee Pension Scheme (EPS) एक महत्वपूर्ण योजना है। यह योजना Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) द्वारा संचालित की जाती है और देश भर में लाखों कर्मचारियों को पेंशन लाभ प्रदान करती है। आइए इस योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Employee Pension Scheme क्या है?

Employee Pension Scheme 1995 में शुरू की गई एक सामाजिक सुरक्षा योजना है जो संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन प्रदान करती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक स्थिरता देना है ताकि वे अपना जीवन सम्मानपूर्वक जी सकें।

यह योजना EPF (Employees’ Provident Fund) से जुड़ी हुई है और जब भी कोई कर्मचारी EPF में योगदान करता है, तो उसका एक हिस्सा स्वतः ही EPS में भी जमा होता है। यह व्यवस्था कर्मचारियों के लिए बेहद सुविधाजनक है क्योंकि उन्हें अलग से कोई आवेदन या योगदान नहीं करना पड़ता।

EPS में योगदान कैसे होता है?

जब कोई कर्मचारी EPF में योगदान करता है, तो नियोक्ता कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12% EPF खाते में जमा करता है। इस 12% में से 8.33% EPS खाते में जाता है (अधिकतम ₹1,250 प्रति माह की सीमा के साथ) और बाकी 3.67% EPF खाते में जमा होता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कर्मचारी को अपनी सैलरी से सीधे EPS में कोई कटौती नहीं होती। केवल नियोक्ता का योगदान ही EPS में जाता है, जबकि कर्मचारी का पूरा 12% योगदान EPF खाते में ही रहता है।

सरकार भी इस योजना में अपना योगदान देती है। वह EPS फंड में 1.16% का अतिरिक्त योगदान करती है, जो इस योजना को और मजबूत बनाता है।

EPS के लिए पात्रता

इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ बुनियादी शर्तें हैं। सबसे पहले, कर्मचारी को EPFO के तहत रजिस्टर्ड संगठन में काम करना होगा। उसकी मासिक बेसिक सैलरी ₹15,000 या उससे अधिक होनी चाहिए।

पेंशन प्राप्त करने के लिए, कर्मचारी को कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करनी होती है। यदि किसी ने 10 साल से कम समय तक काम किया है, तो वह स्कीम सर्टिफिकेट के साथ अपना योगदान वापस ले सकता है। हालांकि, 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद ही नियमित पेंशन का लाभ मिलता है।

58 वर्ष की आयु पूरी होने पर सुपरएन्युएशन पेंशन मिलनी शुरू हो जाती है। लेकिन यदि कोई 50 से 58 वर्ष की आयु के बीच नौकरी छोड़ता है, तो वह अर्ली पेंशन के लिए भी आवेदन कर सकता है, जो कम दर पर मिलती है।

पेंशन की गणना कैसे होती है?

EPS पेंशन की गणना एक विशेष फॉर्मूले से होती है जो आपकी सेवा अवधि और औसत वेतन पर आधारित है। फॉर्मूला इस प्रकार है:

मासिक पेंशन = (Pensionable Salary × Pensionable Service) / 70

यहां Pensionable Salary का मतलब आपकी सेवा के अंतिम 60 महीनों की औसत सैलरी से है। Pensionable Service आपके द्वारा काम किए गए वर्षों की संख्या है।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 35 साल काम किया और उसकी अंतिम 60 महीनों की औसत सैलरी ₹10,000 है। तो उसकी मासिक पेंशन होगी: (10,000 × 35) / 70 = ₹5,000 प्रति माह।

न्यूनतम पेंशन की राशि ₹1,000 प्रति माह है, जो 10 साल की सेवा वाले सदस्यों को मिलती है। अधिकतम पेंशन की कोई सीमा नहीं है, यह आपकी सेवा अवधि और वेतन पर निर्भर करती है।

EPS के विभिन्न प्रकार

इस योजना के तहत कई तरह की पेंशन मिलती है। सुपरएन्युएशन पेंशन सबसे सामान्य है जो 58 वर्ष की आयु के बाद मिलती है। अर्ली पेंशन उन लोगों के लिए है जो 50 वर्ष की आयु के बाद लेकिन 58 से पहले नौकरी छोड़ देते हैं, हालांकि इसमें कुछ कटौती होती है।

यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को विडो पेंशन या चिल्ड्रेन पेंशन मिलती है। विडो पेंशन पति या पत्नी को जीवनभर मिलती रहती है। बच्चों को 25 वर्ष की आयु तक पेंशन मिल सकती है।

डिसेबिलिटी पेंशन उन सदस्यों के लिए है जो नौकरी के दौरान किसी दुर्घटना या बीमारी के कारण विकलांग हो जाते हैं। इस स्थिति में उन्हें नियमित पेंशन से अधिक राशि मिल सकती है।

EPS के फायदे

यह योजना कई तरह से कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह जीवनभर नियमित आय की गारंटी देती है। आपको हर महीने एक निश्चित राशि मिलती रहेगी, जो आपकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।

इसमें कोई अतिरिक्त योगदान नहीं करना पड़ता क्योंकि नियोक्ता का योगदान स्वतः ही EPS में चला जाता है। सरकार का समर्थन भी इस योजना को विश्वसनीय बनाता है। पेंशन की राशि भी महंगाई के साथ बढ़ती रहती है, जिससे आपकी क्रय शक्ति बनी रहती है।

परिवार के सदस्यों के लिए भी सुरक्षा है। यदि सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रितों को पेंशन मिलती रहती है। यह पूरे परिवार के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।

पेंशन कैसे क्लेम करें?

पेंशन क्लेम करने की प्रक्रिया अब पहले से काफी सरल हो गई है। सबसे पहले, आपको Form 10D भरना होता है जो पेंशन के लिए आवेदन फॉर्म है। यह फॉर्म EPFO की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है या नजदीकी EPFO ऑफिस से प्राप्त किया जा सकता है।

आवेदन के साथ कुछ दस्तावेज जमा करने होते हैं जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और आयु प्रमाण पत्र। यदि आप विडो पेंशन या डिसेबिलिटी पेंशन के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत होगी।

अब आप ऑनलाइन भी पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। EPFO की वेबसाइट पर जाकर UAN से लॉगिन करें और ऑनलाइन क्लेम सबमिट करें। आपका आधार और बैंक खाता UAN से लिंक होना जरूरी है। डिजिटल दस्तावेज अपलोड करें और आवेदन सबमिट कर दें।

आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, आमतौर पर 20-30 दिनों में पेंशन शुरू हो जाती है। पहली पेंशन में पिछले महीनों की बकाया राशि भी शामिल होती है।

Higher Pension Option

2014 से पहले, जिन सदस्यों की सैलरी ₹6,500 से अधिक थी, वे अपनी पूरी सैलरी पर EPS योगदान कर सकते थे। सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के बाद, पुराने कर्मचारियों को भी Higher Pension का विकल्प मिला है।

Higher Pension के लिए, कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को अपनी पूरी सैलरी पर EPS योगदान देना होता है, न कि केवल ₹15,000 की सीमा तक। इससे रिटायरमेंट के बाद काफी अधिक पेंशन मिलती है।

हालांकि, इस विकल्प के लिए आवेदन करने की एक समय सीमा थी जो अब समाप्त हो चुकी है। लेकिन जिन लोगों ने आवेदन किया था, उनके मामले अभी भी प्रक्रिया में हैं। यदि आपने आवेदन किया है, तो अपने आवेदन की स्थिति नियमित रूप से चेक करते रहें।

नौकरी बदलते समय क्या करें?

जब आप नौकरी बदलते हैं, तो अपना UAN (Universal Account Number) नए नियोक्ता को बताएं। इससे आपका EPS खाता ऑटोमैटिक ट्रांसफर हो जाएगा और आपकी सेवा अवधि में कोई रुकावट नहीं आएगी।

यदि आप दो महीने से अधिक समय तक बेरोजगार रहते हैं, तो आपकी सेवा में गैप माना जाता है। इसलिए जल्द से जल्द नई नौकरी ज्वाइन करना बेहतर है। लेकिन अगर गैप हो भी जाता है, तो चिंता न करें – आपकी पिछली सेवा अवधि सुरक्षित रहती है।

यदि आप विदेश में नौकरी करने जा रहे हैं, तो अपना EPS खाता सक्रिय रखने के लिए EPFO से संपर्क करें। कुछ देशों के साथ भारत की सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट है, जिससे आपकी सेवा अवधि वहां भी गिनी जा सकती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

अपने UAN और PF खाता नंबर को हमेशा सुरक्षित रखें। ये नंबर आपकी पेंशन क्लेम करते समय बेहद जरूरी होते हैं। अपना मोबाइल नंबर और ईमेल UAN पोर्टल पर अपडेट रखें ताकि आपको सभी महत्वपूर्ण अपडेट मिलते रहें।

हर साल अपने EPF और EPS खाते का स्टेटमेंट चेक करें। इससे आपको पता रहेगा कि आपका योगदान सही तरीके से जमा हो रहा है या नहीं। यदि कोई गड़बड़ी दिखे, तो तुरंत अपने नियोक्ता या EPFO से संपर्क करें।

रिटायरमेंट से कुछ महीने पहले ही अपने सभी दस्तावेज तैयार कर लें। इससे पेंशन क्लेम करते समय कोई परेशानी नहीं होगी। बैंक खाता, आधार और पैन कार्ड को UAN से लिंक करना न भूलें।

अंतिम विचार

Employee Pension Scheme भारतीय कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है। यह न केवल रिटायरमेंट के बाद नियमित आय सुनिश्चित करती है, बल्कि आपके परिवार को भी सुरक्षा प्रदान करती है। इस योजना का पूरा लाभ उठाने के लिए, अपनी सेवा अवधि को लगातार बनाए रखें और समय-समय पर अपने खाते की जानकारी अपडेट करते रहें।

Important FAQs

  1. EPS में कम से कम कितने साल काम करना जरूरी है?

EPS का लाभ उठाने के लिए आपको कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करनी होती है। यदि आप 10 साल से कम काम करते हैं, तो आप स्कीम सर्टिफिकेट के साथ अपना योगदान वापस ले सकते हैं, लेकिन नियमित पेंशन नहीं मिलेगी।

  1. क्या मैं 58 साल से पहले पेंशन ले सकता हूं?

हां, आप 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, इसमें पेंशन की राशि कम होगी क्योंकि हर साल के लिए 4% की कटौती होती है। 58 साल की उम्र में पूरी पेंशन मिलती है।

  1. क्या EPS में मेरा खुद का पैसा कटता है?

नहीं, EPS में आपकी सैलरी से कोई कटौती नहीं होती। केवल नियोक्ता के 12% योगदान में से 8.33% EPS में जाता है। आपका पूरा 12% योगदान EPF खाते में ही रहता है।

  1. अगर मैं नौकरी बदलूं तो क्या होगा?

जब आप नौकरी बदलते हैं, तो आपका EPS खाता UAN के माध्यम से ऑटोमैटिक ट्रांसफर हो जाता है। बस नए नियोक्ता को अपना UAN बता दें। आपकी सेवा अवधि जारी रहेगी और कोई नुकसान नहीं होगा।

  1. Higher Pension क्या है और मैं इसके लिए कैसे आवेदन करूं?

Higher Pension का विकल्प उन लोगों के लिए था जिनकी सैलरी ₹15,000 से अधिक थी। इसमें पूरी सैलरी पर EPS योगदान होता है। हालांकि, इसके लिए आवेदन की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। अधिक जानकारी के लिए EPFO से संपर्क करें।

  1. यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाए तो क्या होता है?

यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो उसके पति/पत्नी को विडो पेंशन मिलती है जो मूल पेंशन का 50% होती है। यदि पति/पत्नी नहीं है, तो बच्चों को 25 साल की उम्र तक पेंशन मिल सकती है।

  1. पेंशन कैसे मिलती है – मासिक या वार्षिक?

पेंशन हर महीने आपके बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर होती है। आमतौर पर महीने के अंत या शुरुआत में यह राशि क्रेडिट हो जाती है। आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं होती।

  1. क्या पेंशन की राशि बढ़ती रहती है?

हां, सरकार समय-समय पर महंगाई को ध्यान में रखते हुए पेंशन में वृद्धि करती है। यह Dearness Relief के रूप में मिलती है, जो आपकी क्रय शक्ति को बनाए रखने में मदद करती है।

  1. ऑनलाइन पेंशन के लिए कैसे आवेदन करूं?

EPFO की वेबसाइट पर जाएं और अपने UAN से लॉगिन करें। Online Services में Pension Claim का विकल्प चुनें। Form 10D भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और सबमिट कर दें। आपका आधार और बैंक खाता UAN से लिंक होना जरूरी है।

  1. EPS और EPF में क्या अंतर है?

EPF एक savings scheme है जहां आप और आपका नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं और रिटायरमेंट पर एकमुश्त राशि मिलती है। EPS एक pension scheme है जो रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन देती है। EPF में ब्याज मिलता है जबकि EPS में नियमित आय की गारंटी होती है।

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  • Vikas Gupta

    Since 2000 I am doing stock market trading, previously worked with various credit card, loan, insurance and other financial related company.

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Since 2000 I am doing stock market trading, previously worked with various credit card, loan, insurance and other financial related company.

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