Business News – Control Money https://controlmoney.in ControlMoney.in Wed, 14 Jan 2026 11:56:10 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://controlmoney.in/wp-content/uploads/2025/08/control-money-favicon.png Business News – Control Money https://controlmoney.in 32 32 UPI AutoPay Recurring Payments को एक क्लिक में बंद कैसे करें: NPCI का ऑफिशियल पोर्टल और आसान स्टेप-बाय-स्टेप तरीका https://controlmoney.in/upi-autopay-recurring-payments/ https://controlmoney.in/upi-autopay-recurring-payments/#respond Thu, 22 Jan 2026 12:26:27 +0000 https://controlmoney.in/?p=1678 UPI AutoPay Recurring Payments को एक क्लिक में बंद कैसे करें: NPCI का ऑफिशियल पोर्टल और आसान स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

UPI AutoPay Recurring Payments – आजकल डिजिटल भुगतान का उपयोग तेजी से बढ़ा है, खासकर UPI (Unified Payments Interface) के जरिए। AutoPay एक बेहतरीन फीचर है जो आपकी recurring payments जैसे OTT सब्सक्रिप्शन, मोबाइल/बिल पेमेंट्स, EMIs, insurance प्रीमियम और भी बहुत कुछ बिना हमें हर बार भुगतान करना याद रखें के पैमेंट कर देता है।

लेकिन अक्सर कई लोग भूल जाते हैं कि उन्होंने यह AutoPay सुविधा कब और किन सेवाओं के लिए चालू की थी। कई बार बिना आवश्यकता के हर महीने ₹100, ₹200, ₹500 या उससे अधिक तक कटते रहते हैं।

ऐसे में अब NPCI (National Payments Corporation of India) ने एक सरकारी/आधिकारिक पोर्टल लॉन्च किया है जहाँ से आप अपने सभी UPI AutoPay mandates को एक ही जगह से Pause या Revoke (रोक या बंद) कर सकते हैं। इससे आपको प्रत्येक ऐप में जाकर अलग-अलग सेटिंग चेंज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

1) UPI AutoPay (Recurring Payments) क्या है?

UPI AutoPay एक सुविधा है जिसमें आप मोबाइल ऐप या वेबसाइट के माध्यम से एक e-mandate सक्रिय करते हैं, और फिर हर निर्धारित तिथि पर आपका बैंक अकाउंट से ऑटोमैटिकली पैसे काट लिए जाते हैं। यह सुविधा OTT, utility बिल, EMI, insurance प्रीमियम, mutual fund SIP जैसे recurring charges के लिए बहुत सुविधाजनक है।

मुख्य फायदे:

समय पर भुगतान किसी लेट फीस/पेनल्टी से बचाता है

आपको हर बार UPI PIN दर्ज नहीं करना पड़ता

निश्चित तारीख पर भुगतान सुनिश्चित होता है

EMI, insurance प्रीमियम और SIP जैसे खर्चों में योगदान आसान बनाता है लेकिन समस्या तब होती है जब हम भूल जाते हैं कि कौन-से recurring payment चालू हैं, और अनचाहे खर्च होते रहते हैं।

2) अनचाहे AutoPay क्यों समस्या बनते हैं?

जब आप किसी सेवा के लिए पहले AutoPay चालू करते हैं, तो वह अक्सर हर महीने आपके बैंक खाते से पैमेंट कर देता है-भले ही आप वह सेवा अब उपयोग न कर रहे हों। कई लोग उस सेवा का मोबाइल ऐप डिलीट कर देते हैं, लेकिन AutoPay mandate पहले से ही एक्टिव रहता है। ऐसे में पैसे चुपके-चुपके कटते रहते हैं।

इससे मासिक बजट खराब हो सकता है, अप्रत्याशित पेमेंट्स हो सकते हैं और आपकी बचत पर असर पड़ सकता है। इससे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है कि आप समय-समय पर अपने सभी AutoPay mandates को चेक करें और बेकार वाले को रोक दें।

3) सरकारी पोर्टल से AutoPay कैसे बंद/रोकें?

NPCI ने एक आधिकारिक UPI हेल्प पोर्टल जारी किया है जहाँ आप अपने सभी AutoPay mandates को एक ही जगह से मैनेज कर सकते हैं।

स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:

मोबाइल या कंप्यूटर पर ब्राउज़र खोलें और upihelp.npci.org.in (NPCI का आधिकारिक UPI सपोर्ट पोर्टल) पर जाएँ।

वह मोबाइल नंबर दर्ज करें जो आपके UPI से लिंक है।

OTP के जरिए पुष्टि करें।

“Show My AutoPay Mandates” वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

अब आप सभी एक्टिव recurring payments की लिस्ट देखेंगे।

जिन mandates को आप बंद करना चाहते हैं, उन्हें चुनें।

यहाँ आपको दो ऑप्शन मिलेंगे – Pause (अस्थायी रोक) या Revoke (पूरी तरह बंद)।

  • Pause – अगर आप भविष्य में फिर से वही पेमेंट चालू करना चाहते हैं।
  • Revoke – यदि आप उस recurring payment को कभी-भी नहीं चालू रखना चाहते।

इससे आपका काम केवल एक-क्लिक में हो जाता है, और आपको अलग-अलग ऐप्स में जाकर AutoPay ढूंढने की जरूरत नहीं होती।

4) Apps में से भी AutoPay बंद किया जा सकता है

अगर आप चाहें तो सीधे अपने UPI एप (जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm, BHIM UPI) में भी AutoPay mandates चेक और revoke कर सकते हैं।

उदाहरण (Google Pay):

  • GPay खोलें
  • Profile > AutoPay
  • एक्टिव mandates देखें
  • उस पेमेंट को चुनें और Pause/Cancel करें
  • UPI PIN डालकर पुष्टि करें

PhonePe/Paytm में भी इसी तरह ‘Autopay’ या ‘Manage Payments’ सेक्शन में जाकर आप recurring payments बंद कर सकते हैं।

5) जानने योग्य महत्वपूर्ण बातें

  • AutoPay से कटे पैसे UPI की सामान्य लेन-देन की तरह तुरंत वापस नहीं मिल सकते – अगर गलती से पैसे कट जाएँ, तो आपको सीधे merchant या ऐप से refund मांगना पड़ सकता है।
  • हमेशा समय-समय पर mandates को चेक करें ताकि अनचाहे recurring payments आपके अकाउंट से न कटें।
  • AutoPay mandates 24-hour pre-debit नोटिफिकेशन भी भेजते हैं, जिस से आप आने वाले पेमेंट के बारे में पहले से पता लगा सकते हैं।
  • NPCI का पोर्टल सुरक्षित है और सभी प्रमुख UPI एप्स/Banks के mandates को दिखाता है।

FAQ

UPI AutoPay क्या है?

यह UPI का recurring payments फीचर है जिससे आप हर महीने/क्वार्टर/ब्याज पर अपने बिल, सब्सक्रिप्शन आदि का ऑटोमैटिक पेमेंट कर सकते हैं।

AutoPay mandates को NPCI पोर्टल से क्यों हटाना चाहिए?

कभी-कभी हम भूल जाते हैं कि AutoPay कहाँ लागू है, इसलिए अनचाहे पैसे कटते रहते हैं। NPCI पोर्टल से आप एक-क्लिक में सभी mandates को मैनेज कर सकते हैं।

Pause और Revoke में क्या फर्क है?

Pause से पेमेंट अस्थायी रूप से रुकता है; Revoke से वह पूरी तरह बंद हो जाता है।

क्या AutoPay payments वापस (refund) हो सकते हैं?

नियमित UPI पेमेंट की तरह AutoPay ट्रांजैक्शन्स ऑटोमैटिक वापस नहीं होते; अगर गलती हुई है, तो आपको merchant से सीधे refund माँगना होगा।

क्या NPCI पोर्टल से सब ऐप के AutoPay mandates दिखते हैं?

हाँ – यह सभी UPI-enabled mandates को एक जगह पर दिखाता है, चाहे वह GPay, PhonePe, Paytm आदि ऐप्स के हों।

क्या मैं केवल ऐप से AutoPay बंद कर सकता हूँ?

हाँ – PhonePe, Google Pay, Paytm आदि में भी AutoPay mandates को देख/रोक/बंद किया जा सकता है।

AutoPay mandates कितने प्रकार के recurring payments के लिए हो सकते हैं?

OTT सब्सक्रिप्शन्स, utility/phone bills, EMI, insurance premiums, SIP आदि सभी types के recurring payments AutoPay से हो सकते हैं।

NPCI पोर्टल को उपयोग करने के लिए क्या आवश्यक है?

अपने UPI-linked मोबाइल नंबर से वेबसाइट पर लॉगिन करें और OTP सत्यापन पूरा करें।

AutoPay mandate रोकने से क्या subscription तुरंत बंद हो जाएगा?

Recurring payments तो रुकेंगे; लेकिन subscription उस सेवा पर कुछ validity तक जारी रह सकती है जैसा कि service provider की policy में लिखा है।

AutoPay mandates को कितनी बार चेक करना चाहिए?

हर 3-6 महीने में एक बार mandates चेक करना अच्छा अभ्यास है ताकि अनचाहे पेमेंट से बचा जा सके।

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New Income Tax Act – अप्रैल 2026 से लागू होगा नया आयकर कानून, जानिए आम टैक्सपेयर्स के लिए क्या-क्या बदलेगा https://controlmoney.in/new-income-tax-act/ https://controlmoney.in/new-income-tax-act/#respond Tue, 20 Jan 2026 07:26:35 +0000 https://controlmoney.in/?p=1596 New Income Tax Act – अप्रैल 2026 से लागू होगा नया आयकर कानून, जानिए आम टैक्सपेयर्स के लिए क्या-क्या बदलेगा

New Income Tax Act – भारत की Tax System में अब तक का सबसे बड़ा सुधार अप्रैल 2026 से देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार ने दशकों पुराने Income Tax Act, 1961 को खत्म कर उसकी जगह New Income Tax Act, 2025 लाने का फैसला किया है। यह नया कानून 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और इसके साथ ही देश की कर व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश करेगी।

सरकार का दावा है कि नया आयकर कानून न सिर्फ सरल भाषा में लिखा गया है, बल्कि इसमें धाराओं (Sections) की संख्या भी काफी कम कर दी गई है, ताकि आम टैक्सपेयर को टैक्स नियम समझने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट या वकील पर निर्भर न रहना पड़े।

क्यों बदला जा रहा है Income Tax Act, 1961?

Income Tax Act, 1961 पिछले 60 सालों में सैकड़ों बार संशोधित किया जा चुका है। इसके चलते:

कानून बेहद जटिल हो गया

धाराएं समझना मुश्किल हो गया

टैक्स नोटिस और विवाद बढ़े

कोर्ट में लाखों टैक्स केस लंबित हो गए

सरकार का मानना है कि पुराना कानून अब Ease of Doing Business और Digital India के विजन के अनुकूल नहीं है। इसी वजह से इसे पूरी तरह हटाकर नया कानून लाया जा रहा है।

New Income Tax Act, 2025 की सबसे बड़ी खासियतें

नया आयकर कानून सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी संरचना (Structure) पूरी तरह बदली गई है।

सरल और सहज भाषा

नए कानून में:

कठिन कानूनी शब्दों को हटाया गया है

सीधे और स्पष्ट वाक्य इस्तेमाल किए गए हैं

टैक्स नियमों को उदाहरणों के साथ समझाया गया है

इसका मकसद यह है कि आम टैक्सपेयर बिना किसी प्रोफेशनल मदद के अपना टैक्स समझ सके।

धाराओं की संख्या में बड़ी कटौती

पुराने कानून में:

298 से ज्यादा Sections

कई Sub-Sections और Explanations

नए कानून में:

Sections की संख्या काफी घटाई गई है

दोहराव (Duplication) खत्म किया गया है

इससे नियमों की व्याख्या आसान होगी और टैक्स अधिकारियों की मनमानी पर भी लगाम लगेगी।

टैक्स नोटिस और विवादों में आएगी कमी

सरकार का लक्ष्य एक Faceless और Fearless Tax System बनाना है।

नए कानून के तहत:

Automated Processing बढ़ेगी

Human Interface कम होगा

गलत टैक्स नोटिस की संख्या घटेगी

Appeals और Rectification आसान होंगे

इससे टैक्सपेयर और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के बीच टकराव कम होने की उम्मीद है।

Tax Slab और Middle Class को राहत

New Tax Regime को मिलेगा बढ़ावा

Budget 2025 में जो राहतें दी गई थीं, उनके 2026 में भी जारी रहने की पूरी संभावना है।

New Tax Regime के तहत:

₹12 लाख तक की सालाना आय पर Zero Income Tax

Standard Deduction के जरिए Salaried Class को अतिरिक्त राहत

हालांकि इस व्यवस्था में:

Home Loan

Insurance

80C, 80D जैसी Exemptions

का लाभ नहीं मिलता, लेकिन कम टैक्स दरों की वजह से यह व्यवस्था खासतौर पर Salaried Middle Class के लिए फायदेमंद बन गई है।

Old Tax Regime का क्या होगा?

सरकार फिलहाल Old Tax Regime को पूरी तरह खत्म नहीं कर रही है, लेकिन फोकस New Regime पर रहेगा। आने वाले समय में टैक्सपेयर को धीरे-धीरे नई व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

GST System में क्या बदलेगा 2026 में?

सितंबर 2025 में लागू हुआ नया GST Framework, 2026 का पहला पूरा वित्तीय वर्ष होगा।

GST को लेकर बड़ी बातें:

GST Rates में बड़े बदलाव की संभावना कम

पहले ही 375 से ज्यादा Items पर टैक्स घटाया जा चुका है

ज्यादातर सामान 5% और 18% Slab में

अब सरकार का फोकस:

GST Collection को Digital बनाना

Fake Billing और Tax Evasion रोकना

Real-Time Data Matching

Custom Duty में बड़े सुधार

Income Tax और GST के बाद सरकार का अगला फोकस Custom Duty Reform पर है।

Budget 2025-26 में:

Custom Tariff Slabs घटाकर सिर्फ 8

Faceless Assessment अनिवार्य

Import-Export Clearance पूरी तरह डिजिटल

इससे:

कारोबारियों की लागत घटेगी

Clearance Time कम होगा

Global Trade में भारत की स्थिति मजबूत होगी

क्या होगा महंगा और क्या सस्ता?

महंगे बने रहेंगे:

Cigarette

Tobacco Products

Pan Masala

इन पर High Tax और Cess पहले की तरह जारी रहेगा।

सस्ते हो सकते हैं:

Electronics

Mobile Phones

Imported Components

Custom Duty में कटौती और Digital Process की वजह से इनकी कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।

New Income Tax Act 2026 का आम आदमी पर असर

नया कानून:

टैक्स भरने को आसान बनाएगा

डर और भ्रम को कम करेगा

Refund Process तेज करेगा

Litigation घटाएगा

सरकार इसे भारत की आर्थिक व्यवस्था को Global Standard तक ले जाने वाला कदम मान रही है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. New Income Tax Act कब से लागू होगा?

1 अप्रैल 2026 से।

Q2. क्या Income Tax Act 1961 पूरी तरह खत्म हो जाएगा?

हां, उसकी जगह नया कानून लागू होगा।

Q3. क्या टैक्स स्लैब बदल जाएंगे?

बड़े बदलाव की संभावना कम है, New Tax Regime को प्राथमिकता मिलेगी।

Q4. क्या 12 लाख तक इनकम टैक्स फ्री रहेगी?

New Tax Regime में यह सुविधा जारी रह सकती है।

Q5. क्या टैक्स नोटिस कम होंगे?

हां, Automated और Faceless System से नोटिस कम होने की उम्मीद है।

Q6. क्या GST दरें बढ़ेंगी?

फिलहाल इसकी संभावना नहीं है।

Q7. क्या Old Tax Regime खत्म होगी?

अभी नहीं, लेकिन भविष्य में सीमित हो सकती है।

Q8. क्या नए कानून में रिफंड जल्दी मिलेगा?

हां, Digital Processing से Refund Fast होगा।

Q9. व्यापारियों को क्या फायदा होगा?

Custom Duty और GST Process आसान होगा।

Q10. क्या यह कानून आम टैक्सपेयर के लिए फायदेमंद है?

जी हां, यही इसका मुख्य उद्देश्य है।

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एक EMI मिस और शुरू हो जाता है संकट: कैसे Personal Loan NPA बन जाता है https://controlmoney.in/personal-loan-npa/ https://controlmoney.in/personal-loan-npa/#respond Fri, 16 Jan 2026 07:28:49 +0000 https://controlmoney.in/?p=1576 एक EMI मिस और शुरू हो जाता है संकट: कैसे Personal Loan NPA बन जाता है

Personal Loan NPA आज के समय में Personal Loan लोगों की जरूरत बन चुका है। शादी हो, मेडिकल इमरजेंसी हो या किसी जरूरी खर्च को संभालना हो—बिना किसी गारंटी के मिलने वाला यह लोन तुरंत राहत देता है।

लेकिन यही Personal Loan अगर कंट्रोल से बाहर चला जाए, तो कुछ ही महीनों में यह आपकी financial life और credit history दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।

कई लोग सोचते हैं कि “बस एक EMI ही तो मिस हुई है”, लेकिन बैंकिंग सिस्टम में यही एक EMI आगे चलकर बड़ा संकट बन सकती है।

NPA क्या होता है और इसे हल्के में क्यों नहीं लेना चाहिए?

NPA (Non-Performing Asset) कोई मामूली स्टेज नहीं है।

यह वह मोड़ है जहां आपकी अस्थायी पैसों की दिक्कत, लंबे समय की credit problem बन सकती है।

सरल शब्दों में:

जब किसी लोन की EMI लगातार 90 दिन तक नहीं चुकाई जाती, तो बैंक उस लोन को NPA घोषित कर देता है।

NPA बनते ही आप सिर्फ “late payer” नहीं रहते, बल्कि बैंकिंग रिकॉर्ड में defaulter माने जाते हैं।

पर्सनल लोन की दिक्कत अचानक क्यों नहीं आती?

ज्यादातर मामलों में लोग जानबूझकर EMI नहीं रोकते।

अक्सर वजहें होती हैं:

नौकरी का छूट जाना

सैलरी लेट आना

अचानक medical expense

बिजनेस में अस्थायी नुकसान

पहली EMI छूटती है और लगता है कि अगली बार कवर कर लेंगे।

लेकिन दूसरा महीना भी उतना ही मुश्किल निकलता है।

फिर दूसरी EMI भी मिस हो जाती है।

यहीं से असली परेशानी शुरू होती है।

बैंक के फोन क्यों बढ़ने लगते हैं?

जैसे ही EMI मिस होती है:

पहले reminder calls

फिर follow-up calls

और बाद में collection calls

कई लोग डर या तनाव की वजह से कॉल उठाना बंद कर देते हैं।

यही सबसे बड़ी गलती होती है।

क्योंकि:

बैंक कॉल से ज्यादा आपकी response history को नोट करता है।

90 दिन पूरे होने के बाद क्या होता है?

अगर Personal Loan EMI 90 दिन से ज्यादा नहीं चुकाई जाती:

लोन NPA घोषित हो सकता है

मामला collection team को ट्रांसफर हो जाता है

पेनल्टी और अतिरिक्त ब्याज जुड़ने लगता है

अब बैंक का व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है।

NPA बनते ही बैंक का बर्ताव क्यों बदल जाता है?

NPA होने के बाद:

कस्टमर सर्विस खत्म हो जाती है

रिकवरी टीम एक्टिव हो जाती है

भाषा ज्यादा सख्त हो जाती है

लेकिन असली नुकसान फोन कॉल नहीं, बल्कि आपकी Credit Report को होता है।

Credit Score पर सबसे बड़ा असर

जैसे ही डिफॉल्ट रिपोर्ट होता है:

CIBIL Score तेजी से गिरता है

भविष्य के लोन मुश्किल हो जाते हैं

भले ही आप बाद में पूरा पैसा चुका दें:

NPA का रिकॉर्ड सालों तक रिपोर्ट में रहता है

बैंक आपको high-risk borrower मानते हैं

यही कारण है कि लोग कहते हैं:

हालात सुधर जाते हैं, लेकिन रिपोर्ट में पुराना दाग रह जाता है।

पर्सनल लोन में रिकवरी इतनी सख्त क्यों होती है?

Personal Loan एक Unsecured Loan होता है।

इसमें:

कोई प्रॉपर्टी

कोई गारंटी

कोई सिक्योरिटी नहीं होती

इसी वजह से:

बैंक जल्दी पैसा वसूलना चाहता है

रिकवरी प्रक्रिया ज्यादा aggressive होती है

Loan Settlement क्या सच में समाधान है?

कई लोग सोचते हैं कि:

“कुछ समय बाद सेटलमेंट करा लेंगे”

हां, Settlement एक विकल्प है, लेकिन यह clean exit नहीं है।

Settlement में:

पूरा पैसा नहीं चुकाया जाता

Credit Report में Closed की जगह Settled लिखा जाता है

बैंक और NBFC इस फर्क को साफ समझते हैं।

हालांकि:

कुछ मामलों में Settlement ही बेहतर रास्ता होता है

लेकिन इसके long-term नुकसान समझना जरूरी है

सही समय कब होता है एक्शन लेने का?

अगर आपको पहले से लग रहा है कि:

EMI भरने में दिक्कत आएगी

तो:

90 दिन पूरे होने से पहले बैंक से बात करें

अपनी स्थिति साफ-साफ बताएं

Restructuring, EMI relief या temporary solution मांगें

बैंक इस स्टेज पर ज्यादा लचीला होता है।

याद रखें

NPA से बचने का लक्ष्य यह नहीं होना चाहिए कि सब कुछ perfect हो।

लक्ष्य बस इतना होना चाहिए कि:

यह परेशानी आपकी Credit History पर स्थायी दाग न बने।

FAQs: पर्सनल लोन और NPA से जुड़े सवाल

Personal Loan कितने दिन में NPA बनता है?

अगर EMI 90 दिन तक नहीं चुकाई जाए, तो लोन NPA बन सकता है।

क्या एक EMI मिस करने से NPA बन जाता है?

नहीं, लेकिन लगातार EMI मिस होने से खतरा बढ़ता है।

NPA बनने पर CIBIL Score कितना गिर सकता है?

स्कोर 100 से 150 पॉइंट तक गिर सकता है, केस पर निर्भर करता है।

क्या बाद में पैसा चुकाने से NPA हट जाता है?

स्टेटस अपडेट होता है, लेकिन रिकॉर्ड कुछ समय तक रहता है।

Settlement और Closure में क्या फर्क है?

Closure में पूरा भुगतान होता है, Settlement में नहीं।

क्या NPA होने पर नया लोन मिल सकता है?

मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है।

बैंक रिकवरी एजेंट कब भेज सकता है?

जब EMI लंबे समय तक बकाया रहती है और मामला कलेक्शन में चला जाता है।

क्या EMI restructuring से NPA रोका जा सकता है?

हां, अगर समय रहते बैंक से बात की जाए।

NPA रिकॉर्ड कितने साल रहता है?

आमतौर पर 7 साल तक क्रेडिट रिपोर्ट में दिख सकता है।

NPA से बचने का सबसे आसान तरीका क्या है?

EMI मिस होने से पहले बैंक से खुलकर बात करना।

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Union Budget 2026 – क्या पहली बार रविवार को पेश होगा देश का आम बजट? जानें पूरा सस्पेंस https://controlmoney.in/union-budget-2026/ https://controlmoney.in/union-budget-2026/#respond Tue, 13 Jan 2026 12:26:24 +0000 https://controlmoney.in/?p=1555 Union Budget 2026 – क्या पहली बार रविवार को पेश होगा देश का आम बजट? जानें पूरा सस्पेंस

Union Budget 2026 को लेकर देश में उत्सुकता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Finance Minister निर्मला सीतारमण अगले वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट रविवार को पेश कर सकती हैं। यह खबर इसलिए खास है क्योंकि यह शायद पहली बार होगा जब सालाना बजट रविवार को पेश किया जाएगा।

क्यों 1 फरवरी को बजट पेश करने की परंपरा?

संसदीय परंपराओं के अनुसार, भारत में आम बजट का उद्देश्य नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से पहले संसद की मंजूरी पाना होता है।

साल 2017 से आम बजट 1 फरवरी को पेश किया जाने लगा।

इससे पहले बजट फरवरी के आखिरी दिन पेश होता था, और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के पहले तीन महीनों के खर्च के लिए सरकार को पहले ही अनुमति मिल जाती थी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017 में यह बदलाव किया, ताकि पूरे साल का बजट मार्च के अंत तक संसद से मंजूर हो जाए और नए वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले सभी प्रक्रियाएं पूरी हों।

साल 2026 में क्यों होगा खास?

साल 2026 में 1 फरवरी रविवार को पड़ रहा है, इसलिए अगर बजट इस दिन पेश होता है, तो यह होगा पहली बार रविवार को पेश किया गया आम बजट।

संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि इस तरह के फैसले संसदीय मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति तय करती है और सही समय पर निर्णय लिया जाता है।

पहले रविवार को बजट पेश करने का उदाहरण अब तक नहीं मिला।

इतिहास में शनिवार को पेश हुआ बजट

पिछले वर्षों में बजट शनिवार को पेश होने के दो मौके आए हैं:

वर्ष 2015: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी को शनिवार को बजट पेश किया।

साल 2020: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को शनिवार को आम बजट पेश किया।

इन अवसरों पर शेयर बाजार को विशेष रूप से ओपन किया गया था, ताकि वित्तीय और बाजार गतिविधियों में कोई व्यवधान न हो।

संसद में रविवार की बैठकें

संसद की बैठकें विशेष मौकों पर रविवार को होती रही हैं:

2020 में कोरोना महामारी के दौरान

13 मई 2012 को संसद की पहली बैठक की 60वीं वर्षगांठ पर

इसलिए रविवार को बजट पेश करने का प्रावधान संभव और ऐतिहासिक दोनों माना जा सकता है।

निष्कर्ष

अगर Budget 2026 1 फरवरी को रविवार को पेश होता है, तो यह इतिहास में पहली बार होगा। इस कदम से वित्तीय और संसद की प्रक्रियाओं में नई पारदर्शिता आएगी। Share Market, Corporate Planning और आम Taxpayer सभी के लिए यह दिन महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

FAQs

Q1. Budget 2026 किस दिन पेश होगा?

संभावित रूप से रविवार, 1 फरवरी 2026।

Q2. बजट 1 फरवरी को पेश करने की परंपरा कब शुरू हुई?

साल 2017 से।

Q3. पहले रविवार को कभी बजट पेश हुआ था?

नहीं, यह पहला मौका हो सकता है।

Q4. शेयर बाजार पर इसका क्या असर होगा?

बजट के दिन बाजार विशेष रूप से खुलता है और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत मिलते हैं।

Q5. बजट पेश करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

नए वित्त वर्ष से पहले संसद की मंजूरी सुनिश्चित करना और सरकारी खर्च और नीतियों को लागू करना।

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Credit Card Users Alert – रिवॉर्ड और कैशबैक के चक्कर में कर रहे हैं ये गलतियां? Income Tax Notice आ सकता है https://controlmoney.in/credit-card-users-alert/ https://controlmoney.in/credit-card-users-alert/#respond Sun, 04 Jan 2026 12:26:55 +0000 https://controlmoney.in/?p=1238 Credit Card Users Alert – रिवॉर्ड और कैशबैक के चक्कर में कर रहे हैं ये गलतियां? Income Tax Notice आ सकता है

Credit Card Users Alert – आज के समय में क्रेडिट कार्ड सिर्फ भुगतान का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि लोग इसे Rewards Points, Cashback और आकर्षक ऑफर्स कमाने का माध्यम बना चुके हैं। सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो क्रेडिट कार्ड फायदे का सौदा है, लेकिन जरा-सी चूक आपको Income Tax Notice तक पहुंचा सकती है।

दरअसल, इनकम टैक्स विभाग अब Credit Card Spending Pattern पर खास नजर रख रहा है। अगर आपका खर्च आपकी घोषित आय से मेल नहीं खाता या ट्रांजैक्शन संदिग्ध दिखते हैं, तो आप जांच के दायरे में आ सकते हैं।

इस कार्ड से जुडी और जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे – hdfc bank credit card

इस कार्ड से जुडी और जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे – SBI BPCL Credit Card 

रिवॉर्ड के चक्कर में की जा रही सबसे बड़ी गलती

कई लोग रिवॉर्ड पॉइंट्स बढ़ाने के लिए दोस्तों या रिश्तेदारों के खर्च अपने क्रेडिट कार्ड से करते हैं और बाद में उनसे कैश या UPI के जरिए पैसा वापस ले लेते हैं।

इसके अलावा, वॉलेट लोड करना, एक ऐप से दूसरे ऐप में पैसा घुमाना या फर्जी खर्च दिखाना भी आम हो गया है।

इनकम टैक्स विभाग ऐसे ट्रांजैक्शन को ‘Artificial Transactions’ यानी बनावटी खर्च मान सकता है, क्योंकि बाहर से खर्च दिखता है लेकिन असल में कोई वास्तविक खरीद नहीं होती।

सबसे ज्यादा Loan Default in India किसमें होता है? RBI रिपोर्ट ने खोला राज, कुल NPA का 50% से ज्यादा हिस्सा इन्हीं कर्जों का

इनकम से ज्यादा खर्च बना सकता है मुसीबत

अगर आपकी Income Tax Return (ITR) में सीमित आय दिखाई गई है, लेकिन आपके क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में महंगे होटल, इंटरनेशनल ट्रैवल, लग्जरी शॉपिंग या हाई-वैल्यू पेमेंट नजर आते हैं, तो यह सिस्टम में Red Flag पैदा करता है।

इनकम टैक्स विभाग Data Analytics और AI Tools की मदद से ऐसे मामलों की पहचान करता है और खर्च के स्रोत को लेकर आपसे जवाब मांग सकता है।

दोस्तों या रिश्तेदारों को कार्ड देना भी जोखिम भरा

बहुत से लोग अपना क्रेडिट कार्ड परिवार या दोस्तों को इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं और बदले में पैसा ले लेते हैं।

अगर इन पैसों का कोई साफ डॉक्यूमेंटेशन नहीं है और खर्च आपकी इनकम से मेल नहीं खाता, तो टैक्स अधिकारी पूरे खर्च को आपकी अघोषित आय (Unexplained Income) मान सकते हैं।

किराया, HRA और क्रेडिट कार्ड का खेल पड़ सकता है भारी

कुछ सैलरीड लोग HRA Exemption लेने के लिए क्रेडिट कार्ड से माता-पिता या रिश्तेदारों को किराया देते हैं।

अगर:

किराएदारी का संबंध साफ नहीं है

मकान मालिक ने अपनी ITR में किराया नहीं दिखाया

किराए का पैसा वापस आपके अकाउंट में आ गया

तो इनकम टैक्स विभाग आपकी HRA छूट रद्द कर सकता है और पेनल्टी भी लगा सकता है।

पर्सनल कार्ड से बिजनेस खर्च करना भी सावधानी मांगता है

अगर आप अपने Personal Credit Card से बिजनेस या ऑफिस खर्च करते हैं और बाद में रीइंबर्समेंट लेते हैं, तो हर खर्च का:

सही बिल

इनवॉइस

रीइंबर्समेंट रिकॉर्ड

होना जरूरी है। खासकर तब, जब उस खर्च पर भारी Cashback या Rewards मिले हों। टैक्स विभाग इसे अतिरिक्त लाभ या इनकम मान सकता है।

Reward Points पर टैक्स कब लगता है?

आमतौर पर:

अगर Reward Points सिर्फ डिस्काउंट या गिफ्ट के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं, तो टैक्स नहीं लगता

लेकिन अगर इन्हें Cashback या पैसे में बदला जाता है और साल भर में इनकी वैल्यू तय सीमा से ज्यादा हो जाती है, तो इसे Income from Other Sources मानकर टैक्स लगाया जा सकता है

Income Tax Notice से कैसे बचें?

सबसे जरूरी है कि आपका क्रेडिट कार्ड खर्च आपकी घोषित आय के अनुरूप हो। हर ट्रांजैक्शन का साफ सोर्स और रिकॉर्ड रखें।

रसीदें, इनवॉइस, बैंक स्टेटमेंट और रीइंबर्समेंट डॉक्यूमेंट सुरक्षित रखें और बिना जरूरत दूसरों के खर्च अपने कार्ड से न करें।

निष्कर्ष (Conclusion)

क्रेडिट कार्ड सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह सुविधा और फायदे दोनों देता है, लेकिन Rewards और Cashback के लालच में की गई चालाकी आपको टैक्स नोटिस और कानूनी झंझट में डाल सकती है। थोड़ी सी समझदारी और पारदर्शिता आपको बड़ी परेशानी से बचा सकती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या क्रेडिट कार्ड खर्च पर इनकम टैक्स नजर रखता है?

हां, खासकर हाई-वैल्यू और असामान्य खर्च पर।

Q2. दोस्तों के खर्च अपने कार्ड से करना गलत है?

अगर बार-बार और बिना रिकॉर्ड किया जाए, तो जोखिम भरा हो सकता है।

Q3. Reward Points पर टैक्स लगता है?

डिस्काउंट पर नहीं, लेकिन कैश में बदलने पर लग सकता है।

Q4. Income से ज्यादा खर्च दिखने पर क्या होगा?

इनकम टैक्स विभाग खर्च का सोर्स पूछ सकता है।

Q5. क्या क्रेडिट कार्ड से किराया भरना गलत है?

नहीं, लेकिन HRA नियम पूरे होने चाहिए।

Q6. बिजनेस खर्च पर्सनल कार्ड से कर सकते हैं?

हां, लेकिन पूरा डॉक्यूमेंटेशन जरूरी है।

Q7. Credit Card Cashback को इनकम माना जा सकता है?

कुछ मामलों में हां।

Q8. Income Tax Notice आने पर क्या करें?

घबराएं नहीं, सही डॉक्यूमेंट्स के साथ जवाब दें।

Q9. क्या हर क्रेडिट कार्ड यूजर पर जांच होती है?

नहीं, सिर्फ संदिग्ध मामलों में।

Q10. टैक्स परेशानी से बचने का सबसे आसान तरीका क्या है?

ट्रांसपेरेंट खर्च और सही रिकॉर्ड रखना।

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सबसे ज्यादा Loan Default in India किसमें होता है? RBI रिपोर्ट ने खोला राज, कुल NPA का 50% से ज्यादा हिस्सा इन्हीं कर्जों का https://controlmoney.in/loan-default-in-india/ https://controlmoney.in/loan-default-in-india/#respond Sun, 04 Jan 2026 07:26:55 +0000 https://controlmoney.in/?p=1236 सबसे ज्यादा Loan Default in India किसमें होता है? RBI रिपोर्ट ने खोला राज, कुल NPA का 50% से ज्यादा हिस्सा इन्हीं कर्जों का

Loan Default in India – आज के समय में लोन लेना जितना आसान हो गया है, उतना ही जोखिम भरा भी होता जा रहा है। खासकर कुछ ऐसे कर्ज हैं, जिनमें अगर एक बार भुगतान चूक गया, तो व्यक्ति कर्ज के जाल में फंस सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया रिपोर्ट यही चेतावनी देती है।

RBI के अनुसार, Personal Loan और Credit Card ऐसे कर्ज हैं जिनमें सबसे ज्यादा Loan Default देखा जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कुल Non-Performing Assets (NPA) में इनकी हिस्सेदारी अब 50 फीसदी से भी ज्यादा हो गई है।

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कौन-सा लोन सबसे ज्यादा जोखिम भरा है?

RBI की Financial Stability Report बताती है कि बिना गारंटी वाले यानी Unsecured Loans—जैसे पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड—सबसे ज्यादा डिफॉल्ट हो रहे हैं। इन लोन को लेना आसान होता है और इन पर कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखनी पड़ती, लेकिन ब्याज दरें बहुत ऊंची होती हैं।

इसी वजह से जरा-सी चूक भी लंबे समय का आर्थिक संकट बन सकती है।

How to Block a Lost Credit Card in India – भारत में खोए हुए क्रेडिट कार्ड को ब्लॉक कैसे करें?

कुल Loan Default में कितनी हिस्सेदारी?

रिपोर्ट के मुताबिक, असुरक्षित खुदरा कर्जों में डिफॉल्ट का हिस्सा अब सभी शेड्यूल बैंकों के कुल रिटेल डिफॉल्ट का 53.1% तक पहुंच चुका है।

यानि आधे से ज्यादा खराब कर्ज सिर्फ पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड से जुड़े हैं।

Private Banks में ज्यादा खतरा

RBI के आंकड़ों से यह भी साफ होता है कि इस तरह के जोखिम भरे लोन का दबाव Private Banks में ज्यादा है।

Private Banks के कुल Loan Default में 76% हिस्सा Unsecured Loans का है

जबकि Public Sector Banks में यह आंकड़ा सिर्फ 15.9% के आसपास है

कुल मिलाकर बिना गारंटी वाले कर्ज का NPA अनुपात लगभग 1.8% बताया गया है।

एक से ज्यादा जगह से लोन लेना बना खतरा

RBI ने यह भी कहा है कि जिन उधारकर्ताओं ने 5 या उससे ज्यादा संस्थानों से Unsecured Loan ले रखे हैं, उनमें भुगतान न कर पाने की संभावना कहीं ज्यादा देखी गई है।

यह स्थिति खासकर Fintech Apps के कारण बढ़ी है, जहां लोन जल्दी और बिना ज्यादा जांच के मिल जाता है।

Fintech कंपनियों से तेजी से बढ़ा कर्ज

रिपोर्ट के अनुसार:

Fintech कंपनियों के कुल लोन पोर्टफोलियो में 70% से ज्यादा Unsecured Loan हैं

इनमें से 50% से अधिक कर्ज 35 साल से कम उम्र के लोगों को दिए गए हैं

सितंबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच फिनटेक लोन में 36.1% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा Personal Loan का रहा।

Credit Card Default की स्थिति

Credit Card से जुड़े डिफॉल्ट भी तेजी से बढ़े हैं।

Credit Card NPA Amount: करीब ₹6,742 करोड़

कुल Credit Card Outstanding: ₹2.92 लाख करोड़ से ज्यादा

3 महीने से 1 साल तक के बकाया की वैल्यू: लगभग ₹34,000 करोड़

विशेषज्ञों के अनुसार, Over-Spending, Job Loss और Minimum Amount Trap ही Credit Card Default के सबसे बड़े कारण हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

RBI की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि Personal Loan और Credit Card सबसे ज्यादा जोखिम भरे कर्ज बन चुके हैं। आसान उपलब्धता और ऊंची ब्याज दरें इन्हें खतरनाक बनाती हैं। समय पर भुगतान न हो तो ये कर्ज तेजी से बढ़कर गंभीर वित्तीय संकट पैदा कर सकते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले अपनी आय, EMI क्षमता और जरूरत का सही आकलन करना बेहद जरूरी है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. सबसे ज्यादा Loan Default किसमें होता है?

Personal Loan और Credit Card में।

Q2. Unsecured Loan क्या होता है?

जिसमें कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखनी पड़ती।

Q3. Credit Card Default क्यों बढ़ रहा है?

Over-Spending, Job Loss और ऊंची ब्याज दरों की वजह से।

Q4. RBI के अनुसार कुल NPA में इनकी हिस्सेदारी कितनी है?

50 फीसदी से ज्यादा।

Q5. Private Banks में Default ज्यादा क्यों है?

क्योंकि Unsecured Loan का एक्सपोजर ज्यादा है।

Q6. Fintech Apps से लोन लेना कितना सुरक्षित है?

अगर सीमित और जरूरत के अनुसार लिया जाए तो ठीक, वरना जोखिम बढ़ता है।

Q7. एक से ज्यादा जगह से लोन लेना सही है?

नहीं, इससे Default का खतरा बहुत बढ़ जाता है।

Q8. Credit Card का Minimum Amount भरना ठीक है?

यह सिर्फ अस्थायी राहत है, लंबी अवधि में कर्ज बढ़ाता है।

Q9. Loan Default होने पर क्या नुकसान होता है?

Credit Score गिरता है और भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो जाता है।

Q10. Loan Default से कैसे बचें?

EMI क्षमता के अनुसार लोन लें और समय पर पूरा भुगतान करें।

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Singapore Loan Default – 1.75 करोड़ का कर्ज बना 147 करोड़! ब्याज और पेनल्टी ने कैसे बिगाड़ दी सिंगापुर के शख्स की ज़िंदगी https://controlmoney.in/singapore-loan-default/ https://controlmoney.in/singapore-loan-default/#respond Sat, 03 Jan 2026 07:26:54 +0000 https://controlmoney.in/?p=1235 Singapore Loan Default – 1.75 करोड़ का कर्ज बना 147 करोड़! ब्याज और पेनल्टी ने कैसे बिगाड़ दी सिंगापुर के शख्स की ज़िंदगी

Singapore Loan Default – कर्ज अगर सही शर्तों पर न लिया जाए, तो वह किसी भी इंसान की पूरी ज़िंदगी उलट-पलट कर सकता है। सिंगापुर से सामने आया एक मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां 1.75 करोड़ रुपये का लोन बढ़ते-बढ़ते 147 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस हैरान कर देने वाले मामले ने एक बार फिर हाई-इंटरेस्ट लोन और पेनल्टी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

2010 में लिया था 1.75 करोड़ का लोन

The Straits Times की रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर के इस व्यक्ति ने साल 2010 में एक लाइसेंस प्राप्त मनीलेंडर से करीब 1.75 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।

लोन की शर्तें बेहद सख्त थीं

4% मासिक ब्याज

8% लेट पेमेंट इंटरेस्ट

हर महीने अलग से लेट पेमेंट प्रोसेसिंग फीस

शुरुआत में यह रकम संभालने लायक लग रही थी, लेकिन समय के साथ ब्याज और जुर्माने ने कर्ज को बेकाबू कर दिया।

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चार साल में ही दोगुना से ज्यादा हुआ कर्ज

सिर्फ चार साल के भीतर ही यह लोन 1.75 करोड़ से बढ़कर करीब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

इसके बाद ब्याज और पेनल्टी का चक्र चलता रहा और रकम हर साल तेजी से बढ़ती चली गई।

आखिरकार साल 2021 तक पहुंचते-पहुंचते यह बकाया रकम 147 करोड़ रुपये तक जा पहुंची, जिसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाए।

कर्ज चुकाने के लिए बेचना पड़ा 14 करोड़ का घर

कर्ज के दबाव में आकर व्यक्ति ने जुलाई 2016 में अपना 14 करोड़ रुपये का घर मनीलेंडिंग कंपनी के डायरेक्टर को बेच दिया।

हैरानी की बात यह है कि घर बेचने के बाद भी वह अपने परिवार के साथ उसी मकान में किराएदार बनकर रहने लगा।

इसके लिए उसे हर महीने करीब 5 से 6 लाख रुपये किराया देना पड़ता था।

यानी कर्ज खत्म होने के बजाय उसकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ती चली गईं।

किराया विवाद से मामला पहुंचा अदालत

बाद में किराया भुगतान को लेकर विवाद हुआ और व्यक्ति ने घर खाली करने से इनकार कर दिया।

मामला सिंगापुर हाई कोर्ट तक पहुंच गया, जहां जज Philip Jeyeratnam ने इस केस को बेहद गंभीर बताया।

जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि

“1.74 करोड़ रुपये का लोन ब्याज और फीस के कारण टेंस ऑफ मिलियंस तक पहुंच जाना बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक है।”

हाई कोर्ट ने दिया रिट्रायल का आदेश

उधारकर्ता का आरोप है कि पूरा समझौता केवल दिखावे के लिए था और इसमें

धोखाधड़ी

भ्रम

कानूनी कर्तव्यों के उल्लंघन

की संभावना हो सकती है।

इन्हीं आरोपों को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने मामले का रिट्रायल कराने का आदेश दिया है, ताकि यह साफ हो सके कि यह लेनदेन कहीं अवैध तरीके से तो नहीं किया गया।

यह मामला क्या सिखाता है?

यह केस एक कड़ी चेतावनी है कि

हाई-इंटरेस्ट लोन

मासिक कंपाउंडिंग

लेट पेमेंट पेनल्टी

कैसे किसी छोटे से कर्ज को भी आर्थिक तबाही में बदल सकते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. 1.75 करोड़ का लोन 147 करोड़ कैसे हो गया?

उच्च मासिक ब्याज, लेट फीस और लंबे समय तक भुगतान न होने के कारण।

Q2. इस लोन पर ब्याज दर कितनी थी?

4% प्रति माह ब्याज और 8% लेट पेमेंट ब्याज।

Q3. क्या यह मनीलेंडर लीगल था?

हां, वह लाइसेंस प्राप्त था, लेकिन शर्तें बेहद सख्त थीं।

Q4. क्या व्यक्ति ने घर बेचकर भी कर्ज खत्म नहीं किया?

नहीं, 14 करोड़ का घर बेचने के बाद भी कर्ज पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

Q5. व्यक्ति उसी घर में क्यों रहता रहा?

घर बेचने के बाद वह उसी मकान में किराए पर रहने लगा।

Q6. अदालत ने इस मामले में क्या कहा?

हाई कोर्ट ने राशि को ‘चौंकाने वाली’ बताया।

Q7. रिट्रायल का आदेश क्यों दिया गया?

संभावित धोखाधड़ी और कानूनी उल्लंघन की जांच के लिए।

Q8. क्या भारत में भी ऐसा हो सकता है?

अगर हाई-इंटरेस्ट और गैर-पारदर्शी लोन लिए जाएं, तो जोखिम रहता है।

Q9. ऐसे कर्ज से कैसे बचा जाए?

लोन की शर्तें पढ़ें, मासिक ब्याज से बचें और समय पर भुगतान करें।

Q10. इस केस से सबसे बड़ी सीख क्या है?

कर्ज लेते समय ब्याज और पेनल्टी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।

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